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Saturday, 27 September 2008

Kesariya

Maid to princess on seeing her distraught:

"मन्दिर माँ सुंदर खड़ी, खड़ी सुखावे केश,
जिनके आँगन केवडा , वो क्यूँ मैला भेष ?"

( Standing in the temple in scroching heat,O beautiful, just to dry your hairs,
for those having kewda in their backyard are not supposed to be slovenly.)

Princess replies nonchalantly:
"आग लगो इस केवडे को,अरे जलो बूझो यह केश
जिस माली का केवडा, वो माली परदेश "
" केसरिया बालम, आओ रे,पधारो म्हारे देश ।"

( Let the Kewda be on fire, and put the hairs to burn,
for the one to whom this Kewda (indicating herself) belongs is not here.
O beloved, come back, come back to me)

This verse is taken from Rajasthani folk song 'Kesariya Balam, Padharo mhaare desh'. The english translation is not word by word but just an attempt to capture the emotion.

Thursday, 25 September 2008

एक धुन्धल्की शाम

एक धुँधल्की शाम,
मद्धम मद्धम साँस,
बोझिल सर, धुआं धुआं,
और दो मुन्तजिर आँख

ऐ मजहर-ए-ग़ज़ल,

आज तुम आओगी ,
अपने साथ मशर्रत लाओगी ,
और इस तीरगी में अपना जमाल फैलाओगी

पर तुम नहीं आई,

तुम्हारा पैगाम आया,
आज भी नही आओगी यह कहलाया,

कल का वादा कर के मुझ को बहलाया

आज फिर वही धुँधल्की शाम,

मद्धम मद्धम साँस,
बोझिल सर, धुआं धुआं,
और दो बुझी सी आँख




ऐ मजहर-ए-ग़ज़ल,
पर कल तुम आना ,
अपने साथ मशर्रत लाना,

और इस तीरगी में अपना जमाल फैलाना




प्रशांत
[मुन्तजिर = awaiting, मजहर-ए-ग़ज़ल = manifestation of Gazal, मशर्रत = happiness,
तीरगी = darkness, जमाल = Beauty]

Friday, 19 September 2008

Aye waada shikan..

ऐ वादा शिकन ख़्वाब दिखना ही नही था,
क्यूँ प्यार किया था जो निभाना ही नही था

इस तरह मेरे हाथ से दामन ना छुड़ाओ,
दिल तोड़ के जाना था तो,आना ही नही था

अल्लाह ना मिलने के बहाने थे हज़ारों,
मिलने के लिए कोई बहाना ही नही था

देखो मेरे सर फोड़ के मरने की अदा भी,
वरना मुझे दीवाना बनाना ही नही था

रोने के लिए सिर्फ़ मुहब्बत ही नही थी,
गम और भी थे दिल का फसाना ही नही था

या हम से ही कहते ना बनी दिल की कहानी,
या गोश बरावाज़ ज़माना ही नही था

क़ैसर कोई आया था मेरी बखयागरी को,
देखा तो गरेबां का ठिकाना ही नही था

Sunday, 14 September 2008

Carrier's formula for handling worries.

Willis H. Carrier's formula for tackling worries..
Step 1: Analyze the situation fearlessly and honestly and figure out what is the worst that can possibly happen as a result of this failure.
Step 2: Reconcile yourself to the worst and accept it.
Step 3: Calmly devote time and energy to try and to improve upon the worst.

Friday, 12 September 2008

Mursheed - Mureed

Listed down is master- follower relationship of famous Sufi saints of the subcontinent. The Master or the guide is called 'Mursheed' and the successor is called 'Mureed' or 'Khalifa'.

Live in a day tight compartment

"Our main business is not to see what lies dimly at a distance, but to do what lies clearly at hands" - Thomas Carlyle

"Take therefore no thought for the morrow; for the morrow shall take thought for the things of itself. Sufficient unto the day is the evil there of" - Jesus

"Everyday is a new life to a wise man"

Thursday, 4 September 2008

Teri surat nigaahon mein firti rahe..


Qawwali is form of sufi devotional music. During a Qawwali , it is observed that, listeners and artists transcend the wordly existence and are united with the Supreme,considered to be the height of spiritual ecstasy in Sufism. Mostly Qawwalis are sung in the name of god or seers but often for beloved. The provenance of Qawwali in Indian subcontinent can be traced to Amir Khusrow. Qawwalis are generally sung at dargahs of Sunni sufi saints. Aziz Mian was one of the most popular qawwals of our time.This beautiful Qawaali is written and rendered by Aziz mian.




दिल के बाज़ार में दौलत नहीं देखी जाती,
मियां, प्यार हो जाए तो सूरत नहीं देखी जाती,
एक तबस्सुम पे दो आलम को नेछावर कर दूँ,
माल अच्छा हो तो कीमत नहीं देखी जाती।

[तबस्सुम = smile , Happiness, आलम= universe]

मैंने दिल दिया, मेरे प्यार की हद थी,
जान दी ऐतबार की हद थी,
मर गए हम खुली रही आँखें,
यह मेरे इंतज़ार की हद थी।

तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे
इश्क तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ।

दिल एक मन्दिर है, आप मूरत हैं,
आप कितने खूबसूरत हैं ।
तुझ को तकते रहे सब तू जो आया मस्जिद में,
नमाज़ सब ने अदा की तेरी अदा के लिए ।


तुझ में जो बात है वो बात नहीं आई है,
क्या ये तस्वीर किसी गैर से खिचवाई है,
मेरे खामोश रहने से ऐ बंदानशीं
तुझ पे इल्जाम आए तो मैं क्या करूँ ।

हस्न और इश्क दोनों में तफरीक है,
क्या करूँ मेरा दोनों पे ईमान है,
गर खुदा रूठ जाए तो सजदे करूँ,
गर सनम रूठ जाए तो मैं क्या करूँ।
[ तफरीक = Difference]


मेरे मरने की तुम मांगते हो दुआ,
ले गला घोट के मैं भी बेज़ार हूँ,
मौत अब तक तो दामन बचाती रही,
तू भी दामन बचाए तो मैं क्या करूं।

ज़ोर लगता गया फसाने में,
राज़ खुलता गया छुपाने में,
तुने तिनके समझ के फूँक दिए
मेरी दुनिया थी आशियाने में।

मैंने ख़ाक-ए-नशेमन को बोसे दिए,
और कह कर यह दिल को समझा लिया की,
आशियाना बनाना मेरा काम था,
कोई बिजली गिराए तो मैं क्या करूँ ।
[ख़ाक-ए-नशेमन = ruins of my dreamhome, बोसे = Kiss]
तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे,
इश्क तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ।