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Saturday, 20 February 2010

Om Shanti

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयः
सर्वे भद्राणि पश्यंतु , माँ कश्चित् दुःख भाग भवेत्
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः
(May all be happy,may all be healthy
may all look for goodness in other, may none be in distress) 
'Shri Adi Shankaracharya'

द्यो शांतिः
अंतरिक्ष शांतिः
पृथिवी शांतिः
आपः शांतिः
औषधयः शांतिः
वन्ष्पत्यः शांतिः
विश्वेदेवाः शांतिः
कामः शांतिः
क्रोधः शांतिः
ब्रम्हः  शांतिः
सर्वे शांतिः
शांति रेवः  शांतिः
शा माः शांतिः रेधि
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः
(4-42-5 - Taittiriya - Aranyaka)
'Ayur Veda'

'Peace unto sky
peace unto heaven
peace unto earth
peace unto water
peace unto medicines
peace unto plants
peace unto gods
peace unto desire
peace unto anger
peace unto almighty
peace unto all
peace begets peace
may peace be in all element

Monday, 8 February 2010

Ab kya bataun main tere milne se kya mila..

As I promised the anonymous reader of my blog, I am putting this beautiful Ghazal by Seemab Akbarabaadi.  Aashiq Husain whose takhallus was 'Seemab' Akbarabadi, was born in 1880 in Agra, India. He was a disciple of Daag Dehlvi. The ghazal goes as:

अब क्या बताऊँ मैंने तेरे मिलने से क्या मिला,
इरफ़ान-ए-गम हुआ मुझे दिल का पता मिला
[इरफ़ान = knowledge]

जब दूर तक न कोई फ़कीर-आशना मिला
तेरा नियाज़मंद तेरे दर से जा  मिला
[नियाज़मंद = needy]

मंजिल मिली मुराद मिली मुद्दा मिला
सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक्श-ए-पा मिला
[नक्श-ए-पा = footprints]

या ज़ख्म-ए-दिल को चीर के सीने से फेंक दे
या ऐतराफ कर के निशान-ए-वफ़ा मिला
[ऐतराफ = admit]

'सीमाब' को शगुफ्ता न देखा तमाम उम्र
कमबख्त जब मिला हमें कम-आशना मिला
[शगुफ्ता = happy, कमबख्त = unfortunate, आशना=friend]

'सीमाब' अकबराबादी

Listen to this version of ghazal by K.L Sehgal

Sunday, 7 February 2010

Teri baatein hee sunaane aaye...

 I am not sure about the first two shers but the rest is by Ahmad 'Faraz'. This ghazal is beautifully sung by Gulaam Ali. 

न उड़ा यूँ ठोकरों से मेरी ख़ाक-ए-कब्र ज़ालिम,
यही एक राह गयी है मेरे प्यार की निशानी

कभी इल्तिफात-ए-पैहम कभी मुझसे बदगुमानी
तेरी वो भी मेहरबानी तेरी ये भी मेहरबानी
[इल्तिफात-ए-पैहम = continuous mercy/favour; बदगुमानी = suspicion]

The Ghazal starts from here

तेरी बातें ही सुनाने आये
दोस्त भी दिल दुखाने आये

फूल खिलते हैं तो हम सोचते हैं
तेरे आने के ज़माने आये

ऐसी कुछ चुप सी लगी है जैसे
हम तुझे हाल सुनाने आये

इश्क तनहा है सर-ए-मंजिल-ए-गम
कौन ये बोझ उठाने आये

अजनबी दोस्त मुझे देख, की हम
कुछ तुझे याद दिलाने आये

अब तो रोने से भी दिल दुखता है
शायद अब होश ठिकाने आये

क्या कहीं फिर कोई बस्ती उजड़ी
लोग क्यूँ जस्न मनाने आये

सो रहो मौत के पहलु में 'फ़राज़'
नींद किस वक़्त न जाने आये

अहमद 'फ़राज़'

Thursday, 4 February 2010

tere shahar mein maine kya dekha hai?

तेरे शहर में तरदीद-ए-रवां देखा है,
हुजूम में मैंने बियाबां देखा है
[तरदीद = contradictions; रवां = continuous ; हुजूम = crowd ; बियाबां = emptiness]
In your city, I see never ending contradictions
I find the crowd empty

शोर-ए-पैहम से गोश बर-आवाज़ है
खलकत-ए-शहर को निहां देखा है
[शोर-ए-पैहम = never ending noise; गोश = ear; बर-आवाज़ = without sound; खलकत-ए-शहर = denizens of the city;निहां = hidden ]
My ears are unable to hear the continuous noise
and I cannot see the denizens of this city

इमारतें बड़ी हैं तेरे शहर में
और सड़कों पे नादारों का मकाँ देखा है
[नादारों = poors, मकाँ = house]
Your city has tall buildings,
but I find poors living on the roads

रोज़ तमाज़त-ए-कार जलाती है
रातों में फ़िक्र-ए-धुंआ देखा है
[रोज़ = daily; तमाज़त-ए-कार = heat of work; फ़िक्र-ए- धुंआ = smoke of worry]
every day the work burns
and every  night is engulfed in worries

मुफलिसों का मजमा लगा है यहाँ  
और उमारा का भी कारवां देखा है
[मुफलिसों = poors; मजमा = gathering; उमारा = rich ; कारवां = caravan]
Here there is a gathering of poors
but also I see caravan of mammons

मुख़्तसर फासला है लोगों के बीच
फिर भी सहरा  उनके दरमियां देखा है
[मुख़्तसर = small ; फासला = distance; सहरा= desert ; दरमियां = inbetween]
There is a small distances between people
but I see a big chasm between them

पर जब से मैंने तुम्हें देखा है,
मैंने दोज़ख में इरम का फजां देखा है
[दोज़ख = hell ; इरम = heaven ; फजां = weather]
but ever since I have seen you
I feel a heaven in this hell
'प्रशांत'